HPU to say good-bye to printing of papers in press

Shimla

The question papers printed from a printing press would soon be a thing of past in various post graduate, graduate level examinations conducted by Himachal Pradesh University (HPU) Shimla. From the next academic session, the HPU administration has decided to conduct all examinations on new pattern. Herein, all the examination centers would be provided question papers online half an hour before the start of exam for download. The print-outs photostat copies would be distributed among all the students appearing in exam. This would not only help the HPU administration in saving money but would take care of the hassles, which always worried the administration during exams. “Being a hill state HPU was facing various problems in conducting examinations as many of its centers are located in remote areas. It had proved to be a tough exercise for HPU to deliver question papers at these well in time every year. ` “Last year, HPU had faced many problems in delivering question papers to its centre at located at Pangi in Chamba and few others in the winter season as snow blocked the road link and helicopter service was also not available for this centre,” said Controller of Examination HPU Dr. Narender Avasthi.

He said that new practice would come into being from next academic session. According to records, more than six lakh students appear in various graduate and post graduate level and other examinations being conducted by HPU every year. The varsity spends over Rs. four crore on this in a year. The amount increases increasing every year. Sources said financial crunch apart, the staff shortage was also a big problem for HPU in conducting the exams smoothly. The new mechanisms not require any transportation and the cost of printing in a press could be done away with. To check paper leaks Box According to the varsity authorities, the new mechanism is expected to check the incidents of paper leak in HPU examinations. An episode of paper leak of a Pre-Medical Test, though at the level of printing press, had tarnished the image of HPU some years ago. The HPU gets the question papers printed for various exams from outside the state. It had been a big challange for HPU to maintain secrecy of the papers.

रावत की बगावत ठंडी करने की कोशिश

नई दिल्ली, [राजकिशोर]। हलक में अटके उत्ताराखंड विवाद में फजीहत कराने के बाद काग्रेस ने अब नया दाव खेला है। विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री पद से नहीं हटाने के फैसले पर अडिग काग्रेस ने बगावती हरीश रावत और उनके समर्थकों को सम्मानजनक रास्ता देने के संकेत दिए हैं। रावत को कैबिनेट मंत्री बनाकर प्रोन्नत किए जाने और उत्ताराखंड सरकार में उनके समर्थकों की मंत्रिपरिषद में ज्यादा भागीदारी के रास्ते निकाले जा रहे हैं। काग्रेस आलाकमान के इस रुख के बाद रावत बुधवार से फिर संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे। टिहरी से सासद विजय बहुगुणा ने उत्ताराखंड के सीएम पद की शपथ ले ली है।

किसी विधायक को ही मुख्यमंत्री बनाने के नाम पर कटे पत्तो के बाद सासद विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री बनाने के फैसले के खिलाफ हरीश रावत मुख्यमंत्री सोनिया गाधी को पत्र लिखकर संसद नहीं गए, तो उनके 17 समर्थक विधायकों ने देहरादून में शपथग्रहण समारोह का बहिष्कार किया। रावत ने सोनिया को लिखे पत्र में कहा कि अगर मुझ पर सबको साथ लेकर चलने का भरोसा नहीं है, तो मैं सभी पदों से इस्तीफा देकर सामान्य कार्यकर्ता की तरह काम करूंगा। इतना ही नहीं उन्होंने उत्ताराखंड के प्रभारी महासचिव चौधरी बीरेंद्र सिंह पर उत्ताराखंड की गलत तस्वीर पेश करने का आरोप भी लगाया। रावत की भाजपा के साथ बातचीत और उत्ताराखंड में पतली हालत को देखकर काग्रेस के प्रबंधक हर मोर्चे पर सक्रिय हुए। काग्रेस नेतृत्व भी यह बात मान रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम से रावत के साथ अन्याय का भाव गहराया है। इसलिए काग्रेस उनके प्रति नरम रुख ही अपनाए रही। रावत के सामने दिक्कत थी कि उनके एक दर्जन से ज्यादा समर्थक विधायक कुछ मानने को तैयार नहीं थे। सूत्रों के मुताबिक, सोमवार-मंगलवार देर रात को उन विधायकों ने रावत से साफ कह दिया कि अगर उन्होंने समझौता किया तो वह हमेशा के लिए उनका साथ छोड़ देंगे।

सूत्रों के मुताबिक पहले किसी भी कीमत पर बहुगुणा को सीएम नहीं बनने देने पर आमादा रावत खेमे ने काग्रेस नेतृत्व की पहल के बाद अपना रुख नरम किया है। अब काग्रेस आलाकमान को संदेश भेजा गया है कि बहुगुणा को मुख्यमंत्री बना दिया कोई बात नहीं, लेकिन अब राजनीतिक हैसियत हमें मिले। सूत्रों के मुताबिक रावत खेमे ने अपने लिए उत्ताराखंड में 70 फीसदी कैबिनेट की जगह मागी है। उत्ताराखंड की मौजूदा स्थिति में ये शर्ते मानना काग्रेस के लिए काफी कठिन है, लेकिन यह रास्ता निकालने के लिए काग्रेस के वार रूम में देर रात तक गुलाम नबी आजाद की दूसरे नेताओं से बैठक चलती रही। काग्रेस के इस रुख के बाद ही रावत ने अपनी चुप्पी तोड़ी और भाजपा के साथ जाने के कयासों को खारिज करते हुए कहा कि मैं काग्रेस की बालिका-वधु हूं, मुझे न्याय चाहिए। रावत यह जताना नहीं भूले कि देहरादून में शपथ के समय काग्रेस के 32 विधायकों में से 17 विधायकों का बहिष्कार करना यह जताने के लिए काफी है कि मेरे साथ कितने विधायक हैं।

मुसाफिरों की इन 5 उम्‍मीदों को पूरा कर पाएंगे त्रिवेदी?

नई दिल्ली. रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी आज लोकसभा में रेल बजट पेश करेंगे। पहली बार रेल बजट पेश कर रहे त्रिवेदी का यह कड़ा इम्तिहान है। देश भर की जनता की रेल मंत्री से कई उम्‍मीदे हैं।
रेल मु‍साफिर सबसे पहले तो यह जानना चाहेंगे कि इस बार भी रेल किराया बढ़ेगा या नहीं। सूत्रों के मुताबिक यात्री किराया बढऩे के आसार बेहद कम हैं। माल भाड़ा बजट से ठीक पहले करीब 22 फीसदी बढ़ा दिया गया है। इसमें भी बढ़ोतरी की गुंजाइश कम ही है।

मुसाफिरों को सबसे अधिक चिंता सफर के दौरान अपनीसुरक्षाको लेकर रहती है। ऐसे में रेल मंत्री रेलवे की सुरक्षा के लिए किन कदमों का ऐलान करते हैं, इस पर भी नजर होगी। रेलवे संरक्षाके लिए काकोडकर समिति की रिपोर्ट के सेफ्टी-सेस लगाने के सुझाव पर अमल के लिए इसका भार यात्रियों पर डाला जाएगा या नहीं, इस पर भी नजर रहेगी। इसके लिए पांच हजार करोड़ रुपए का इंतजाम किया जाना है।

रेलवे में मेट्रो की तर्ज पर सिग्नलिंग एंड टेलीकम्युनिकेशन सिस्टम लगाने की घोषणा भी हो सकती है। राजधानी और शताब्दी जैसी ट्रेनें भले ही अपनी अधिकतम रफ्तार 120 किमी प्रति घंटा से नहीं चल रही हों, लेकिन यात्रियों को लुभाने के लिए इसी ट्रैक पर ज्यादा रफ्तार वाली कुछ ट्रेनों की घोषणा की जा सकती है।

रेल मंत्रालय ने एसी क्लास में पहचान पत्र रखने, तत्काल बुकिंग की अवधि कम करने, ऑनलाइन बुकिंग में एजेंटों का समय तय करने जैसे कई कदम उठाए हैं। इसके बावजूद यात्री टिकट वेटिंग में होने और कालाबाजारीकी शिकायत कर रहे हैं। वेटिंग लिस्ट खत्म करने के लिए रेल मंत्री ने कुछ समय पहले ऐलान किया था। लेकिन कालाबाजारी पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी है।

रेलों में साफ-सफाईकी हालत अच्‍छी नहीं है। मौजूदा टॉयलेटों के कारण पटरियों के रखरखाव पर असर पड़ रहा है। पांच साल के अंदर सभी 43 हजार कोच में ग्रीन टॉइलेट लगाने का प्लान है। टोक्‍यो रेलवे स्टेशन पर 20 प्लैटफॉर्मों से 3000 ट्रेनों को संचालन होता है, जबकि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर 16 प्लैटफॉर्मों से महज 300 ट्रेनों का, लेकिन यह गंदगी और अव्यवस्थाओं के बीच।

ये हैं चुनौतियां 

दिनेश त्रिवेदी पर जहां रेलवे की माली हालत को दुरुस्त करने का दबाव है, वहीं डेढ़ करोड़ रेल यात्रियों की उम्मीदों पर खरा उतरना है। उन्हें रेलकर्मियों को भी बेहतर मैसेज देना होगा। इन सबके बीच अपनी नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मूड को ठीक रखने की चुनौती भी उनके सामने है। दिनेश त्रिवेदी को इसका अंदाजा भी है शायद।

मंगलवार को जब वे पत्रकारों से रू-ब-रू हुए तो ज्यादातर समय खामोश रहे। एक शब्द से तिल का ताड़ न बने, लिहाजा उन्होंने सवालों की बौछारों के बीच चुप रहना ही बेहतर समझा। रेल बजट के ब्रीफकेस के साथ राज्यमंत्रियों के साथ रेलमंत्री ने मुस्कराते हुए पोज देने की परंपरा का निर्वाह किया। फिर संजीदा हो गए। असल में विषम आर्थिक परिस्थिति में उन्हें खुशनुमा रेल बजट पेश करना है। माली हालत खराब होने की वजह से दुनिया भर की परिवहन बिरादरी व बड़े व्यावसायिक घरानों की नजर रेल बजट पर है।

सांसद की जमीन की पैमाइश

 कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र के सांसद डा. राजन सुशांत पर पार्टी की कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर सोमवार को उनके देहरी स्थित आवास के साथ लगती भूमि की पैमाइश की। इस दौरान सांसद घर पर नहीं थे, वह संसद के बजट सत्र में भाग लेने हेतु दिल्ली गए थे। सोमवार को तहसीलदार नूरपुर कविता ठाकुर के नेतृत्व में नायब तहसीलदार सुभाष चौहान, कानूनगो जगत राम, लाल चंद, पटवारी संजीव व विभागीय कर्मियों ने पटवार सर्किल वंडी के तहत पड़ते मौजा खेहर स्थित सांसद के आवास के साथ लगते खसरा नंबर 611/1, 612/1 व 613/1 की पैमाइश की। विभागीय जानकारी के मुताबिक एक व्यक्ति ने कुछ माह पहले विभाग में शिकायत कर सांसद पर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाया था और इस बारे में विभाग ने सांसद को सूचना भेजकर निशानदेही के बारे में सूचित किया था, परंतु सोमवार को सांसद के घर में न होने के बावजूद विभागीय अधिकारियों व फील्ड स्टाफ ने सांसद के घर के साथ लगती जमीन की पैमाइश की। इस मौके पर तहसीलदार नूरपुर कविता ठाकुर ने बताया कि सांसद के मकान के साथ लगती करीब चार कनाल सरकारी जमीन पर कब्जा पाया गया है। इस कार्रवाई को लेकर जब फोन पर डा. राजन सुशांत से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ये मुख्यमंत्री के दबाव के चलते उनकी छवि खराब करने हेतु राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा यह कार्रवाई करवाई गई है और यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई, जब मैं संसद बजट सत्र में भाग लेने हेतु दिल्ली गया हूं। उन्होंने कहा कि वह राजस्व कानूनों से भलीभांति परिचित हैं और नियमों के मुताबिक निशानदेही करने से पहले भूमि के मालिक व शिकायतकर्ता दोनों का होना जरूरी है।

वन में चिंगारी सुलगते ही आएगा मैसेज

मध्य प्रदेश की तर्ज पर अब जल्द ही हिमाचल भी सेटेलाइट सिस्टम से जुड़ने जा रहा है। वन महकमे के आला अधिकारियों की छह माह की अवधि में इस महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू करने की प्रबल उम्मीद है। एमपी के तकनीकी एक्सपर्ट जल्द ही यहां आकर वन कर्मियों को ट्रेनिंग देंगे। इस बड़े प्रोजेक्ट के क्रियान्वित होने से हर वर्ष फायर सीजन में प्रदेश के संवेदनशील व अति संवेदनशील किसी भी जंगल में आग लगते ही एकदम संबंधित बीट पर तैनात वन कर्मी के मोबाइल पर मैसेज के माध्यम से सूचना मिल जाएगी। चीफ कंजरवेटर आग एवं वन संरक्षण हिमाचल प्रदेश अवतार सिंह ने खबर की पुष्टि की है। जानकारी के अनुसार मुख्य अरण्यपाल अवतार सिंह मध्य प्रदेश दौरे पर गए थे और वहां पर इस सिस्टम के बारे में गहन अध्ययन कर आलाधिकारियों से भी गूढ़ जानकारी प्राप्त कर इस प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू किया, जिसमें उन्हें कामयाबी हासिल हुई है। राज्य सरकार ने भी इस प्रोजेक्ट के प्रति खासी दिलचस्पी दिखाते हुए कार्य आगे बढ़ाया। ताजा स्थिति में मध्य प्रदेश सरकार की ओर से इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिलने के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि अगले छह माह तक यह प्रोजेक्ट प्रदेश में शुरू कर दिया जाएगा। प्रोजेक्ट की खासियत यह है कि फायर सीजन में जंगलों में आग लगने पर तत्काल संबंधित बीट पर कार्यरत वनकर्मी के मोबाइल पर मैसेज के माध्यम से सूचना मिलेगी। इससे प्रदेश के जंगल आग से बच पाएंगे और प्रदेश के जंगलों में गर्मियों के मौसम में साल दर साल बढ़ रही आग की घटनाओं की भी रोकथाम होगी। इसी के मद्देनजर सरकार ने मध्य प्रदेश में लागू इस महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को यहां क्रियान्वित करने का निर्णय लेते हुए योजना पर काम शुरू करवाया और अब इस योजना के जल्द प्रदेश में लागू होने की उम्मीद है। उधर, चीफ कंजरवेटर अवतार सिंह ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार की ओर से मंजूरी मिलने के बाद हिमाचल में अगले छह माह तक सेटेलाइट सिस्टम को आरंभ कर दिया जाएगा। यह प्रोजेक्ट सरकार के पास विचाराधीन है और लगभग फाइनल स्टेज पर है। इसका फायदा यह रहेगा कि गर्मियों के  दिनों में जंगल आग के लिहाज से सुरक्षित रहेंगे और आग की घटनाओं पर भी रोक लग पाएगी।

भ्रष्टाचार पर कांग्रेस का सदन से वाकआउट

 विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे रोज भी विपक्ष ने भ्रष्टाचार के मामले पर दूसरी बार दिए गए स्थगन प्रस्ताव नोटिस को मंजूर न किए जाने के कारण सदन की कार्यवाही को बाधित किया। जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्ष की नेता विद्या स्टोक्स व वरिष्ठ सदस्य कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि सोमवार को जब विपक्ष की तरफ से पांच विधायकों विद्या स्टोक्स, कौल सिंह, कुलदीप सिंह पठानिया, हर्षवर्द्धन और प्रकाश चौधरी ने स्थगन प्रस्ताव के लिए नोटिस समय पर दिए थे तो उन पर चर्चा की मंजूरी क्यों नहीं दी जा रही। इसके बाद विपक्ष ने प्रश्नकाल की कार्यवाही में जहां भाग नहीं लिया, वहीं सदन के बीचोबीच आकर नारेबाजी करते हुए कार्यवाही को बाधित करने का प्रयास किया। विपक्षी सदस्य स्वास्थ्य मंत्री डा. राजीव बिंदल के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। प्रश्नकाल समाप्त होते ही विपक्ष ने विरोध स्वरूप सदन से वाकआउट कर दिया। सोमवार को ही राज्यपाल के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा से भी विपक्ष ने किनारा ही रखा। इससे पूर्व विपक्ष की नेता विद्या स्टोक्स ने कहा कि डा. बिंदल के खिलाफ लगे आरोप प्रदेश भर में चर्चा का विषय बन चुके हैं। इसे लेकर ही विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा किए जाने का नोटिस दिया था, जिसे फिर से नामंजूर कर दिया गया। कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि सोमवार को तो नियमों के तहत ही दोपहर साढ़े बारह बजे नोटिस दिया गया था। लिहाजा इस पर चर्चा की मंजूरी दी जानी चाहिए थी। बहरहाल बात बनती न देख सोमवार को विपक्ष ने फिर से जोरदार हंगामा किया और नारेबाजी करते हुए सदन से वाकआउट कर दिया। विपक्षी नेताओं का यह आरोप भी था कि स्थगन प्रस्ताव लाए जाने को लेकर दिए गए नोटिस में पांचों विपक्षी सदस्यों ने आरोप भी स्पष्ट किए हैं। कौल सिंह ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इस मामले से हटकर और कोई बड़ा मुद्दा चर्चा के लिए हो सकता है। कांग्रेस विधायक दल की बैठक आज ः मंगलवार को विधानसभा परिसर के विपक्षी लाउंज में कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। पार्टी के चीफ व्हिप विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने यह जानकारी दी। जाहिर है दो दिन के हंगामे के बाद कांग्रेस फिर से नए मुद्दों को उठाने के लिए कमर कस सकती है।

नियमों के तहत ही स्थगन प्रस्ताव नोटिस नामंजूर ः  विपक्ष के हो-हल्ले के बीच विधानसभा अध्यक्ष तुलसीराम शर्मा ने व्यवस्था देते हुए कहा कि नियमों के तहत ही विपक्ष द्वारा दिए गए स्थगन प्रस्ताव के नोटिस को नामंजूर किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान ऐसे किसी  विषय पर ही चर्चा की मंजूरी दी जा सकती है, जो आपात स्थिति पर आधारित हो। या फिर बेहद जरूरी हो कि अन्य आवश्यक कार्यवाही को छोड़कर चर्चा की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि सूचनाओं से जो विषय उठाया है, वह सामान्य रूप से व्यक्त है। न ही वह हाल ही में घटित है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान नियम हवाला देते हैं कि स्थगन प्रस्ताव नोटिस के तहत चर्चा की मंजूरी नहीं दी जा सकती है। लिहाजा इसे नामंजूर किया जाता है। उन्होंने विपक्ष से धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए भाग लेने का भी आग्रह किया। यह भी कहा कि समय आने पर अपनी बात रखे, मगर विपक्ष नहीं माना।

अपने नेताओं के खिलाफ कोर्ट जाएंगे सुशांत

पार्टी से निलंबित कांगडा-चंबा के सांसद डा. राजन सुशांत अपने नेताओं के खिलाफ कोर्ट जाएंगे। उनका कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री तथा दो अन्य मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के सबूत भाजपा केंद्रीय हाइकमान को सौंपे थे। अब इन सबूतों के साथ वह न्यायालय में भ्रष्टाचार के खिलाफ जा रहे हैं। डा. राजन सुशांत ने अपने निलंबन के बाद पहली बार ‘दिव्य हिमाचल’ को दूरभाष पर बताया कि वह जल्द ही हिमाचल लौट कर धूमल सरकार के खिलाफ बड़ा विस्फोट करने आ रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय हाइकमान से दोबारा अपील की है कि हिमाचल में भाजपा को बचाने के लिए मुख्यमंत्री को हटाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मैंने हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी है और भाजपा केंद्रीय हाइकमान ने मुझे निलंबित करके इसी का इनाम दिया है। उन्होंने कहा कि मैंने हमेशा मुख्यमंत्री तथा आईपीएच मंत्री रविंद्र रवि और स्वास्थ्य मंत्री राजीव बिंदल के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। सोमवार को राजीव बिंदल के त्याग पत्र से यह साबित हो गया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप सही थे। सांसद ने कहा कि मैं जल्द ही हिमाचल आकर अपने समर्थकों के साथ बैठक कर रहा हूं। पार्टी से निलंबित राजन सुशांत ने कहा कि भविष्य की रणनीति भी उनके समर्थक तय करेंगी। उनका कहना है कि हिलोपा में जाना या कोई दूसरा संगठन खड़ा करने के सारे विकल्प उनके पास खुले हैं, जिस पर फैसला मेरे समर्थकों को लेना है। डा. राजन सुशांत ने कहा कि हिमाचल के सीएम को जल्द हटाया नहीं गया तो प्रस्तावित विधानसभा चुनावों में भाजपा दहाई का अंक भी नहीं छू पाएगी। उनका कहना है कि अब भी हाईकमान के पास वक्त है। डा. राजन सुशांत ने कहा कि अब पार्टी ने उन्हें बाहर करके किसी भी तरह के बयान के लिए स्वतंत्र कर दिया है। इससे पहले उन्होंने अपने राजनैतिक जीवन में ही पार्टी के सिद्धांतों में रहकर बयान दिए हैं।

80 ने लांघा रोहतांग दर्रा

सोमवार को कुल्लू जिला में मौसम साफ रहने पर 80 कबायलियों ने रोहतांग दर्रे को आर-पार किया। सोमवार को मौसम साफ होने के कारण विभाग ने लाहुल-स्पीति को उड़ानें करवाईं, जिसमें चौपर ने रोहतांग दर्रे के पार फंसे लोगों को सही सलामत कुल्लू जिला पहुंचाया। विभाग ने सोमवार को पांगी, स्टिंगरी को उड़ानें करवारकर 80 कबायलियों को आर-पार किया। वहीं बांरिग की उड़ान विभाग को लाहुल में खराब मौसम के कारण उड़ान को रद्द करना पड़ा। अच्छा मौसम होने के कारण लाहुल के लोगों को काफी हद तक समस्याओं से छुटकारा मिल गया है। विभाग का कहना है कि अगर मौसम यूं ही उनका साथ देता रहा तो शीघ्र ही लाहुल-स्पीति के लोगों को जो समस्याएं आ रही हैं, उनसे निजात दिला दी जाएगी। लाइजनिंग आफिसर रोशन लाल का कहना है कि सोमवार को मौसम साफ होने पर पांगी, स्टिंगरी के लिए उड़ानें करवाकर 80 कबायलियों को रोहतांग दर्रे से आर-पार किया गया। मौसम अगर विभाग का यूं ही साथ देता रहा तो शीघ्र ही लोगों की समस्याओं को दूर कर दिया जाएगा। बहरहाल सोमवार को कुल्लू जिला में मौसम साफ रहने पर 80 कबायलियों ने रोहतांग दर्रे को आर-पार किया।

सिर्फ 12वीं पास, रात को कंपाउंडर दिन में ‘डाक्टर’

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव अंधेरी के एक घर में छापा मारकर गर्भपात में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां और इंजेक्शन बरामद किए। पुरुषोत्तम नाम का व्यक्ति अपने घर में क्लीनिक चला रहा था जबकि उसके पास न लाइसेंस है और न योग्यता। पुरषोत्तम रात में नारायणगढ़ के संजय अस्पताल में कंपाउंडर की नौकरी भी करता है और दिन में डाक्टर बन घर में मरीजों को देखता था।

शहजादपुर के एसएमओ डा. तरुण प्रसाद के नेतृत्व में डा. सारिका व डा. विनोद की टीम ने रविवार करीब तीन बजे पुरुषोत्तम के घर पर छापा मारा। घर में सरकारी एसएमएम की सीरिंज, नींद लाने के लिए इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन डायजापाम, गर्भपात करने की मिसोप्रोस्ट की गोलियां, गर्भ की जांच करने वाली स्टिक, टीके लगाकर इस्तेमाल की गई सीरिंज और अन्य दवाइयां मिली हैं।

ऐसे दवाइयां डिग्री प्राप्त डाक्टर ही प्रेस्क्राइब कर सकता है। टीम ने जब पुरुषोत्तम से पूछा कि ये दवाइयां घर में क्यों रखी गई हैं? तो वह कोई जवाब नहीं दे पाया। डाक्टर प्रसाद का कहना है कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पुरुषोत्तम व उसकी पत्नी गांव में अवैध रूप से गर्भपात करते थे और मोटी रकम वसूलते थे। छापेमारी में कुछ एक्सपायरी दवाइयां भी मौके पर पाई गई हैं। डायजापाम का इंजेक्शन मिलने पर पुरुषोत्तम ने बताया कि एक बच्चे को दौरे पड़ते हैं उसे अक्सर यह टीका लगाया जाता है।

कर्ज से परेशान किसान ट्रेन के आगे कूदा

बैंक कर्ज से परेशान गांव कुत्तीवाल के किसान हरनैल सिंह ने शनिवार देर शाम रेलवे स्टेशन पर फिरोजपुर-दिल्ली पैसेंजर ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

हरनैल सिंह के बेटे भोला सिंह ने बताया कि लगभग दस साल पहले उसकी मां करतार कौर का लंबी बीमारी के चलते देहांत हो गया था। उसका इलाज करवाने के लिए पिता को कर्ज लेना पड़ा था। इस कर्ज को उतारने के लिए पिता ने अपनी दो एकड़ जमीन भी बेच दी थी। इसके बाद भी सहकारी कृषि बैंक तलवंडी साबो का कर्ज उन पर बाकी था।

बैंक उनकी जमीन को नीलाम करने की कार्रवाई शुरू कर चुका था। इससे वह परेशान चल रहे थे। उधर, भाकियू सिद्धूपुरा के जिला प्रधान बलदेव सिंह ने कहा कि सरकार कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की तरफ ध्यान नहीं दे रही है, इसलिए किसान आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहे हैं।